हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में चीन की संदिग्ध गतिविधियां फिर से दिखने लगी हैं। हाल ही में एक चीनी रिसर्च शिप ने यहां 16 दिन तक अपना AIS सिस्टम बंद रखा। सूत्रों के मुताबिक ये पोत समुद्र के अंदर की जानकारी जुटाकर भविष्य में पनडुब्बियों के लिए रास्ता बना रहा था। चीन के शी यान-1, शी यान-6 और युआन वांग-5 जैसे जहाज पहले भी भारत के आसपास पकड़े जा चुके हैं। खास बात ये है कि चीन बांग्लादेश के बंदरगाहों में भी बड़ा निवेश कर चुका है, जिससे उसे अपनी जासूसी और लॉजिस्टिक बेस मजबूत करने में मदद मिल रही है।

चीन ने बीते कुछ सालों में बांग्लादेश में बंदरगाहों और समुद्री आधारभूत ढांचे में बड़ा निवेश किया है। खासकर चटगांव और मोंगला पोर्ट के विस्तार में चीन की बड़ी भूमिका है। इससे चीन को इस क्षेत्र में लॉजिस्टिक बेस बनाने में मदद मिलती है और वह अपने जहाजों को ईंधन भरने और मरम्मत के बहाने लंबे वक्त तक बंगाल की खाड़ी में मौजूद रख सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश ने चीन को खुली छूट दी तो यह भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।