नरसिंहपुर – कलेक्टर शीतला पटले ने कहा कि नशा बहुत प्रकार के होते है, नशा बच्चों का बचपना खराब करता है, इसे रोकना बहुत जरूरी है, जिससे नशा बच्चों के लिए खराब आदत व तनाव का कारण न बने। समाज में आने वाली पीढ़ी नशा से पीड़ित न हो, इसके लिए बच्चों को नशा की प्रवृत्ति से रोकना होगा। बच्चों को सही शिक्षा देनी होगी, जिससे बच्चे अच्छाई व बुराई को समझ कर सही निर्णय ले सके। कलेक्टर ने बुधवार को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नरसिंहपुर में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित जागरूकता अभियान “नशे से दूरी- है जरूरी” कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक मृगाखी डेका, जिला पंचायत सीईओ दलीप कुमार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया, जिला शिक्षा अधिकारी एमएस खान सहित पुलिस विभाग के अधिकारी और शिक्षा विभाग के प्राचार्य, शिक्षक व शिक्षिकाएं मौजूद थी। आयोजित कार्यक्रम में नशा के प्रति जागरूकता के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के संदेशों का प्रसारण किया गया। इस अवसर पर नशा के दुष्परिणाम के संबंध में भी लघु फिल्म दिखाई गई। कार्यक्रम के पश्चात उपस्थित जनों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई।
कलेक्टर शीतला पटले ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व होता है कि वे बच्चों में यह समझ तैयार करें, कि क्या सही है और क्या गलत है, जिससे बच्चे सही और गलत का आकलन कर सके। उन्होंने बच्चों को ड्रग्स, शराब, तम्बाकू इत्यादि नशीली पदार्थों से दूर रखने, इंटरनेट व सोशल मीडिया की उपयोगिता और दुष्परिणाम के बारे में बताने को कहा। माता- पिता हमेशा बच्चों के सम्पर्क में रहें। बच्चों को बदलते परिवेश में शामिल होने दें। नई- नई चीजों को सीखने दें, जिससे वे अपने उद्देश्यों को पूरा कर सके। बच्चों को उनकी क्षमताओं को विकसित करने का पूरा अवसर दें, जिससे बच्चों का बेहतर भविष्य और उनका जीवन सुरक्षित बन सके। उन्होंने बच्चों को बेहतर व्यवहार देने और अच्छी आदतों को सीखने के लिए प्रेरित करने को कहा। बच्चों को डराने व तनाव में न रखने की सलाह दी। बच्चों में खराब आदत, व्यवहार और नशा की प्रवृत्ति होने के पूर्व उसे रोकने को कहा।
कलेक्टर शीतला पटले ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व है कि बच्चों को शिक्षा देकर उनका भविष्य सुधारना, जिससे उनका जीवन बेहतर बन सके। शिक्षक बच्चों को सही मार्गदर्शन दें, क्योंकि बच्चे अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय शिक्षक की देखरेख में विद्यालय में ही व्यतीत करते हैं। शिक्षक बच्चों को प्रेमपूर्वक समझाएं, नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताएं, जिससे बच्चा नशा जैसी प्रवृत्ति को स्वीकार न कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को बताएं कि वह अपना समय व ज्ञान का उपयोग आगे बढ़ने में करें। बच्चों के लिए लक्ष्य निर्धारित करें तथा परिश्रम कर लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरित करें, जिससे बच्चे सही समय दिशा में आगे बढ़े और उचित निर्णय ले सके। कलेक्टर ने स्कूल भ्रमण के दौरान अपने अनुभवों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों में वाक क्षमता और विचार अभिव्यक्ति को बढ़ाएं। बच्चों की जीवन शैली को सही दिशा दें। शासन के द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसका वे पूर्णत: पालन करें, जिससे बच्चे आगे बढ़कर एक जिम्मेदार नागरिक बन सके। आयोजित कार्यक्रम को पुलिस अधीक्षक मृगाखी डेका, जिला पंचायत सीईओ दलीप कुमार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया ने भी संबोधित किया। उन्होंने इस अवसर पर नशे के दुष्परिणाम, बच्चों में बेहतर आदतें विकसित करने तथा उनके साथ उचित व्यवहार करने के बारे में बताया। आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित नशे से दूरी है जरूरी अभियान के संबंध में जिले में आयोजित कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।




















































































