प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाविद्यालय उमरिया में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. अरविंद शाह बरकड़े ने कार्यक्रम के आरंभ में प्राचीनतम गुरु-शिष्य परंपरा की ऐतिहासिक झलक प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि चिकित्सा विज्ञान की सर्वाेच्च प्रणाली आयुर्वेद का आरंभ स्वयं ब्रह्मा जी द्वारा किया गया, जिन्होंने ब्रह्म संहिता के माध्यम से चिकित्सा ज्ञान का सृजन किया। इस ज्ञान को आचार्यों, देवों और ऋषियों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित और विकसित किया।

प्राचार्य डॉ. विमला मरावी ने अपने उद्बोधन में गुरु की भूमिका को एक धागे के रूप में वर्णित किया जो पीढ़ियों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल अध्यापक नहीं होता, वह संस्कारों, शोध और विचारों का संवाहक होता है। गुरु ही वह शक्ति है जो अपने ज्ञान के माध्यम से पीढ़ियों को शिक्षित, संस्कारित और जागरूक करता है। उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा, समाजशास्त्र और राजनीति सभी क्षेत्रों में गुरु की अनुपम भूमिका को रेखांकित किया। सेवानिवृत्त रसायनशास्त्र प्राध्यापक डॉ. एम.एन. स्वामी ने अनुसंधान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,वास्तविक ज्ञान तब ही जन-जन तक पहुंचता है जब वह शोध की कसौटी पर खरा उतरता है। शिष्य के माध्यम से ही गुरु के ज्ञान का विस्तार होता है। उन्होंने आयुर्वेद की ज्ञान परंपरा में देवताओं और आचार्यों की भूमिका को स्मरणीय ढंग से प्रस्तुत किया।

पुरूषोत्तम तिवारी ने कहा कि यह आयोजन न केवल एक रस्म है, बल्कि गुरु के योगदान और शिक्षा के महत्व को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का एक सार्थक माध्यम सिद्ध हुआ। विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों के सम्मिलित प्रयासों ने इसे एक प्रेरणादायक अवसर में परिवर्तित कर दिया।पी.डी. रावत ने अपने प्रेरक विचारों में कहा कि गुरु स्वयं सर्वत्र उपस्थित न होकर भी अपने शिष्यों द्वारा संपूर्ण संसार में ज्ञान का प्रचार करता है। यही सच्चा गुरु है जो केवल शिक्षित नहीं करता, बल्कि समाज को जागरूक बनाता है।उन्होंने विद्यार्थियों के प्रति वात्सल्यभाव और चिकित्सकों के सामाजिक उत्तरदायित्व को भी रेखांकित किया। ऋषिराज पुरवार ने सभी अतिथियों, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस समारोह को “संवेदना और शिक्षा का संगम” बताया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने भारतीय संस्कृति की आत्मा, अर्थात गुरु-शिष्य परंपरा को न केवल पुनः जागृत किया, बल्कि यह दर्शाया कि ज्ञान का सही मार्ग अनुसंधान, समर्पण और अनुशासन से ही प्रशस्त होता है। यह समारोह एक प्रेरणा स्रोत बना, जो आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने वाला साबित होगा। गुरू पूर्णिमा समारोह में सभी संकायों के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं पूरी श्रद्धा के साथ उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पुरूषोत्तम तिवारी, गणमान्य नागरिक, गुरूजन, प्रबुद्ध व्यक्तित्व एवं आम जन को आमंत्रित किया गया। विद्यार्थियों ने भी कविता,भाषण एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं परंपरागत भारतीय रीति से तिलक और नारियल अर्पित कर गुरुओं का स्वागत किया। आमंत्रित अतिथि भाव-विभोर होकर सहभागी हुए,जिससे गुरुकुल परंपरा की जीवंत झलक दिखाई दी।राज्यस्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक लाइव एवं यूट्यूब के माध्यम से महाविद्यालय परिसर में दिखाया गया, जिससे विद्यार्थीगण, शिक्षक एवं अन्य नागरिकों को मुख्यमंत्री जी के संदेश का लाभ प्राप्त हुआ।