मंगलवार देर रात सवाई माधोपुर जिले में हुई मूसलाधार बारिश ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में निर्माणाधीन 300 बेड के जिला अस्पताल के कैंपस में बनाई गई RCC पक्की सड़क महज कुछ महीनों में ही भारी बारिश के पानी में बह गई। यह सड़क अस्पताल के मुख्य गेट से इमारत के भीतर जाने का एकमात्र रास्ता थी, जो अब पूरी तरह टूट चुकी है। सड़क के करीब 10 फीट हिस्से को बारिश का तेज बहाव बहाकर ले गया, जिससे कैंपस के अंदर जाने का कोई रास्ता फिलहाल नहीं बचा है।
तेज बहाव में सड़क बह गई जैसे मिट्टी की हो
तेज बारिश के बाद आसपास के तालाबों और नालों का पानी शहर में कई जगहों पर सड़कों और पुलियों को बहा ले गया। अस्पताल परिसर की यह सड़क भी इस तेज बहाव में बह गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क देखने में मजबूत लग रही थी, लेकिन हकीकत में उसकी मजबूती बेहद कम थी। अगर अस्पताल इस समय चालू होता और इस रास्ते से एंबुलेंस या मरीज गुजर रहे होते, तो हालात गंभीर हो सकते थे।
निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
यह हादसा अस्पताल निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया क्वालिटी के उपयोग की ओर इशारा करता है। माना जा रहा है कि सड़क निर्माण में मानक के अनुरूप मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे यह कुछ ही महीनों में बह गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे निर्माण कार्यों की निगरानी और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि जनता के टैक्स के पैसों का सही उपयोग हो सके।
अस्पताल के बेसमेंट में पानी भरने से नींव को खतरा
सिर्फ सड़क ही नहीं, अस्पताल के बेसमेंट में भी कई फीट तक पानी भर गया है। इससे न केवल निर्माण कार्य बाधित हुआ है, बल्कि इमारत की नींव को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेसमेंट में पानी भरने से सीलन और स्ट्रक्चरल डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश से बचाव की कोई तैयारी नहीं
बारिश के मौसम में पानी निकासी की व्यवस्था पहले से तैयार नहीं की गई थी। न तो ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया और न ही पानी रोकने के लिए कोई अस्थायी इंतजाम। इस लापरवाही ने अस्पताल के पूरे परिसर को जलमग्न कर दिया।
जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने इंजीनियरों की टीम को मौके पर भेजकर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, स्थानीय लोग अब खुली और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो सके।
सरकारी निर्माण पर फिर सवाल
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राजस्थान में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी में गंभीर खामियां हैं। यदि इन पर सख्ती से सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे हादसे आम हो सकते हैं, जिनका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा।






















































































































