राजस्थान में लागू हुई नई टाउनशिप नीति, अब शहरी विकास होगा ज्यादा नियोजित और जवाबदेह

जयपुर: राजस्थान सरकार ने प्रदेश के शहरी विकास को नया आयाम देने के लिए 15 साल पुरानी टाउनशिप नीति को बदलते हुए नई टाउनशिप नीति 2025 लागू कर दी है। नगरीय विकास विभाग द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति को स्वीकृति दी गई थी।

पुरानी नीति की कमियों से मिली सीख

वर्ष 2010 में लागू हुई पुरानी नीति में कई व्यावहारिक कमियां सामने आई थीं — जैसे छोटे भूखंडों में जनसुविधाओं की अनदेखी, पार्क और खेल मैदान का अभाव, और डेवलपर्स की जिम्मेदारी तय न होना। इन्हीं कारणों से नई नीति की आवश्यकता महसूस की गई।


नई टाउनशिप नीति के प्रमुख प्रावधान

सुनियोजित विकास के लिए सख्त दिशानिर्देश:

  • अब हर टाउनशिप योजना में कम से कम 15% भूमि पार्क, खेल मैदान और जनसुविधाओं के लिए अनिवार्य रूप से छोड़ी जाएगी।
    • इसमें से 7% भूमि पार्क व खेल मैदान के लिए, और
    • 8% भूमि जन उपयोग के लिए निर्धारित होगी।
  • इससे पहले यह व्यवस्था केवल बड़ी योजनाओं तक सीमित थी।

विकासकर्ताओं की जवाबदेही बढ़ी:

  • टाउनशिप का 5 वर्षों तक रखरखाव डेवलपर द्वारा किया जाएगा।
  • इसके लिए 2.5% भूखंड निकाय के पास रहन रखे जाएंगे, जो समय पर कार्य पूरा होने पर मुक्त किए जाएंगे।
  • समग्र विकास कार्यों के पूरा होने पर ही निकाय का सहायक अभियंता प्रमाण पत्र जारी करेगा।

हरित और जल संरक्षण उपाय:

  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट वाटर रिसाइकल को अनिवार्य किया गया है।
  • सभी जल स्रोतों (नदी, नाला, तालाब आदि) के दोनों ओर बफर ज़ोन तय होंगे।
  • पार्कों में सामुदायिक जल संरक्षण ढांचा बनाने की अनुमति होगी।

डिजिटल ट्रांसपेरेंसी और पोर्टल:

  • एक राजस्थान रियल एस्टेट वेब पोर्टल बनाया जाएगा, जिसमें डेवलपर योजनाओं की पूरी जानकारी अपलोड करेंगे।
  • इससे आमजन के लिए योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी।

गरीब और श्रमिकों के लिए विशेष प्रावधान:

  • औद्योगिक योजनाओं में 5% भूमि श्रमिकों के लिए आरक्षित होगी।
  • ईडब्लूएस और एलआईजी वर्ग के लिए निर्माण कर उन्हें निकाय या आवासन मंडल द्वारा आवास उपलब्ध करवाए जाएंगे।

राज्य स्तरीय निगरानी और कार्यान्वयन समिति

नई नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक इंप्लीमेंटेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें संबंधित विभागों के सचिवों के साथ डेवलपर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।


कैसे अलग है नई नीति पुरानी से:

बिंदुपुरानी नीतिनई नीति
जनसुविधाएंछोटे भूखंडों में जरूरी नहींअब हर योजना में 15% ज़रूरी
खेल मैदानकोई प्रावधान नहींअब 3% भूमि आरक्षित
रखरखाव3 साल तक, पर कोई गारंटी नहीं5 साल तक, 2.5% भूमि रहन
जल प्रबंधनसीमित प्रावधानरेन हार्वेस्टिंग और वेस्ट रिसाइकल अनिवार्य
पारदर्शिताऑफलाइन प्रक्रियारियल एस्टेट पोर्टल अनिवार्य