जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद चातुर्मास निवास के लिए मुंबई पहुंचे। मुंबई के हिंदी-मराठी के बवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि वह मुंबई में रहकर मराठी भाषा सीखेंगे। उन्होंने बताया कि रविवार से उन्होंने मराठी भाषा सीखना शुरू भी कर दिया है। शंकराचार्य ने कहा कि ‘अब मैं मराठी सीखकर मराठी में बातचीत शुरू करूंगा और तब ही अपने धाम लौटूंगा.’। 

शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने जानकारी दी है कि आज यानी 13 जुलाई से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मराठी सीखना शुरू किया है। उन्हें महाराष्ट्र के लोगों से उन्हीं की भाषा में संवाद करना है। शंकराचार्य ने कहा कि मराठी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक पुल है। शंकराचार्य के लिए मुंबई के कोरा केंद्र परिसर में विशेष चातुर्मास आवास की व्यवस्था की गई है। वहां आश्रम कुटी का निर्माण किया गया है। स्वामी जी के प्रवचन, साधना सत्र, दर्शन और शिष्य संवाद के कार्यक्रम अगले दो महीनों तक चलेंगे। मुंबई और आसपास के श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि मराठी केवल भाषा नहीं है बल्कि स्थानीय संस्कृति और जनमानस के सम्मान का प्रतीक है।